Chuhiya Ka Swayamvar / चुहिया का स्वयंवर

चुहिया का स्वयंवर

गंगा नदी के किनारे तपस्वियों का एक आश्रम था। वहाँ याज्ञवलक्य नाम के मुनि रहते थे। मुनिवर एक दिन नदी के किनारे जल लेकर आचमन कर रहे थे कि उनकी अंजुली में, बाज के चोंच से छुटकर, एक चुहिया गिर पड़ी।

मुनि ने अपने प्रताप से उसे एक सुंदर कन्या में बदल दिया और अपने आश्रम ले आए। उन्होंने अपनी पत्नी से कहा, “इसे प्रेम से अपनी बच्ची की तरह पालो।”

मुनि पत्नी उसे पाकर बहुत प्रसन्न हुई और बड़े प्यार से उसका लालन-पालन किया। जब वह विवाह योग्य हो गई तब उन्होंने मुनि से योग्य वर ढूंढकर उसके हाथ पीले करने के लिए कहा।

मुनि ने तुरंत सूर्य देव को बुलाकर अपनी कन्या से पूछा, ‘पुत्री! त्रिलोक को प्रकाशित करने वाला सूर्य क्या तुम्हें पतिरूप में स्वीकार है?‘

पुत्री ने मना करते हुए कहा, “नहीं, इनके तेज के कारण मैं इनसे आंख नहीं मिला सकती।”

मुनि ने सूर्य देव से पूछा, “आप अपने से अच्छा कोई वर सुझाएं।” सूर्यदेव ने कहा, “मुझसे अच्छे मेघ हैं वह मेरे प्रकाश को भी ढक देते हैं।” 

मुनि ने मेघ को बुलाकर पुत्री से पूछा कि क्या वह उसे पसंद हैं? कन्या ने उसे काला कहकर मना कर दिया। मुनि ने मेध से कहा, “कृपया, अपने से शक्तिशाली वर बताएं।”

मेघ ने कहा कि पवन उनसे अधिक ताकतवर है। “यह तो बड़ा चंचल है” यह कहकर कन्या ने मना कर दिया। 

मुनि ने पवन से उत्तम वर के लिए पूछा तो उन्होंने कहा पर्वत मुझसे अधिक अच्छा है। मुनि ने पर्वत को बुलाकर कन्या की राय जानी तो उसने कहा, “यह तो बड़ा कठोर और गंभीर है।”

मुनि ने पर्वत से अधिक योग्य कौन है जब पूछा तो उसने उत्तर दिया, “श्रीमान! मुझसे अच्छा चूहा है जो मुझे खोदकर बिल बना लेता है।” 

मुनि ने मूषकराज को बुलाया। उसे देखकर कन्या बहुत प्रसन्न हुई और बोली, “पिताजी! मुझे मूषिका बनाकर मूषकराज को सौंप दीजिए।” मुनि ने पुनः उसे चुहिया बना दिया और चूहे के साथ विवाह कर दिया। 

इस कहानी से शिक्षा

हर चमकने  वाली  चीज सोना  नहीं  होती।

Chuhia ka Swayamvar

There was an ashram of ascetics on the banks of river Ganges. There lived a sage named Yajnavalkya.

One day Munivar was soaked with water on the banks of the river that in his palm, after leaving the eagle’s beak, a stick fell.

The sage transformed her into a beautiful girl with his greatness and brought him to his ashram. He told his wife, “Love is like a baby girl.”

The Muni wife was very happy to find him and took care of him with great love.

When she became eligible for marriage, she asked the sage to find her worthy bridesmaid and yellow her hands.

The sage immediately called the sun god and asked his daughter, ‘Daughter! Do you accept Surya publishing Trilok as a husband? ‘

The daughter refused, saying, “No, I can’t get my eyes off them because of their sharpness.”

The sage asked Surya Dev, “You should suggest a better groom than you.” Suryadev said, “I have better clouds, they also cover my light.”

Muni called Meghha and asked the daughter if he liked her. Kanya refused, calling him black.

The sage said to Medha, “Please, tell a stronger groom than yourself.”

Megh said that Pawan is more powerful than her. The girl refused, saying “this is very fickle”.

When the sage asked Pawan for the best groom, he said that the mountain is better than me.

When the sage called the mountain to know the opinion of the girl, she said, “This is very harsh and serious.”

When the monk asked who is more qualified than the mountain, he replied, “Sir! I am a good mouse who digs me and makes a bill.”

Muni called Mushkaraj. The girl was very happy to see him and said, “Father! Make me a rat(mushaka) and hand it over to Mushkaraj.”

Muni again made him a she-rat(chuhiya) and married Rat.

Learnings From This Story

All that glitters is not gold.

कहानी सुनने के लिए ऑडियो को प्ले करिये

चुहिया का स्वयंवर/Chuhia ka Swayamvar

5 thoughts on “Chuhiya Ka Swayamvar / चुहिया का स्वयंवर”

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